

🔴 सहारनपुर बीस हज़ार के इनामी अंतरराष्ट्रीय स्मैक तस्कर की धड़कनें थमीं — 4.320 किलोग्राम स्मैक, कार, नकद और मोबाइल बरामद… सहारनपुर पुलिस के ऐतिहासिक प्रहार से नशा सिंडिकेट में भूचाल!
सदर बाज़ार, सहारनपुर में नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार जिस तेज़ी से पैर पसार रहा था, उसे सदर बाज़ार थाना पुलिस ने एक ऐसे महाअभियान में धराशायी कर दिया, जो हालिया समय में पुलिस विभाग की सबसे सटीक, सबसे प्रभावी और सबसे साहसिक कार्रवाई के रूप में दर्ज हो चुका है; वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के स्पष्ट निर्देशों पर गठित विशेष मादक-पदार्थ-निरोधी दस्ते ने मुखबिर तंत्र, तकनीकी निगरानी, डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण और रणनीतिक घेराबंदी के बाद एक ऐसे सक्रिय, शातिर और बहु-स्तरीय संपर्कों वाले इनामी तस्कर को गिरफ्तार कर लिया, जो लंबे समय से सिंथेटिक नशे की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनकर बेरोकटोक काम कर रहा था; पुलिस सूत्रों के अनुसार तस्कर न केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश के युवाओं को निशाना बनाकर माल खपाता था, बल्कि कई अन्य जनपदों—मुज़फ़्फ़रनगर, मेरठ और देवबंद—तक अपने नेटवर्क का दायरा फैलाने की गहरी और सुनियोजित साज़िश रच चुका था; जिस समय पुलिस ने उस तक पहुँच बनाई, वह एक अत्यधिक महँगी और असाधारण मात्रा की खेप को “सुरक्षित ठिकाने” तक पहुँचाकर छोटे-छोटे आपूर्ति बिंदुओं में बाँटने की अंतिम तैयारी कर चुका था; यह खेप 4.320 किलोग्राम स्मैक की थी, जिसकी अनुमानित अंतरराष्ट्रीय कीमत लगभग चार करोड़ तैंतीस लाख रुपये आँकी गई, जो यह सिद्ध करती है कि खेप स्थानीय स्तर की नहीं, बल्कि बड़े अंतरराष्ट्रीय नशा बाज़ार की माँग और आपूर्ति तंत्र से पोषित थी; पुलिस ने तस्कर की कार को भी अपने कब्ज़े में लिया—टोयोटा ग्लैंज़ा—जो नशीली सामग्री के परिवहन और वितरण रणनीति में प्रयुक्त की जा रही थी; तलाशी के दौरान 01 अत्याधुनिक संचार उपकरण जैसा मोबाइल—एप्पल का फोन—भी बरामद हुआ, जिसमें कई अंतरराष्ट्रीय संपर्कों, भुगतान साक्ष्यों और आपूर्ति से जुड़े कूट-संदेशों के डिजिटल निशान मिले; इसके अतिरिक्त 7,000 रुपये नगद, सिम-आधारित संचार साक्ष्य और पैकेजिंग-वितरण से जुड़े अन्य प्रारंभिक संकेत भी पुलिस के हाथ लगे, जो यह दर्शाते हैं कि तस्कर का गिरोह केवल पदार्थ की बिक्री तक सीमित नहीं, बल्कि “नशा-वितरण-प्रबंधन-सिंडिकेट” की तर्ज पर काम कर रहा था; पुलिस की गिरफ्त में आते ही तस्कर ने पहले स्वयं को निर्दोष बताने की कोशिश की, लेकिन जब उसके डिजिटल अभिलेखों, वित्तीय लेन-देन साक्ष्यों और मुखबिर पुष्टियों को उसके सामने रखा गया, तो पूरा अपराध-ढाँचा ताश के पत्तों की तरह बिखर गया; गिरफ्तारी अभियान में पुलिस अधीक्षक यातायात और नगर क्षेत्राधिकारी का पर्यवेक्षण भी शामिल रहा, जिससे यह एक “बहु-विभागीय पुलिस तालमेल-आधारित महाअभियान” बन गया; पुलिस के अनुसार आरोपी से जुड़े सहयोगी/आपूर्ति स्रोतों की पहचान, वित्तीय मार्गों का नक्शा, वितरण बिंदुओं की शृंखला और संभावित विदेश-लाभार्थियों की सूची खंगाली जा रही है और जल्द ही इससे कहीं बड़े खुलासे होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता; यह भी बताया गया है कि इस खेप का उद्देश्य विद्यालय-कॉलेज-छात्रों से लेकर राजमार्ग-आधारित नशा आपूर्ति बिंदुओं तक माल खपाना था, जिसे पुलिस ने समय रहते विफल कर दिया; इस ऐतिहासिक प्रहार से नशा गिरोहों में दहशत फैल गई है और यह संदेश भी साफ़ हो गया कि पुलिस विभाग अब केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं, बल्कि नशे के पूरे ढांचे को जड़ सहित उखाड़ने के संकल्प के साथ काम कर रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को इस सामाजिक महामारी से बचाया जा सके; पुलिस सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई भविष्य में अन्य जिलों के लिए भी “मानक-मॉडल-अभियान” बनेगी, क्योंकि स्मैक जैसी सामग्री की इतनी बड़ी खेप को पकड़ना सामान्य गिरफ्तारी नहीं, बल्कि नशे के अवैध अंतरराष्ट्रीय कारोबार पर एक निर्णायक प्रहार है, जिसने पुलिस कार्रवाई की प्रतिष्ठा और इसकी सटीकता को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है।
रिपोर्ट: अलिक सिंह, विशेष कवरेज — वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ | संपर्क: 8217554083 📞








